Shristi Briksha Chart Explanation is given below
इस सृष्टि-वृक्ष चार्ट की व्याख्या नीचे दिया गया है !



सम्पूर्ण को सम्पूर्णतया जनाने वाला उपर्युक्त सृष्टि-वृक्ष वाले चार्ट में सम्पूर्ण को कुल चार क्षेत्रों में विभाजित हुआ दिखाया गया है जो इस प्रकार हैं--
The above chart has been shown in Two sections -- Descending and Ascending order of Universe from and into GOD.

1.Descending Order of Creation of the Universe
(सृष्टि की उत्पत्ति पतन क्रम में)
चार्ट के दाहिने साइड में परमात्मा से सृष्टि की उत्पत्ति दिखाई गयी है । परमेश्वर से ईश्वर, ईश्वर से जीव, जीव से शरीर, शरीर से संसार । The Chart shows Descending way of creation of the Universe on the right side as from Parmeshwar to Eeshwar, from Eeshwar to Jeeva, from Jeeva to body and from body to world..
2. Ascending Order of Submergence of the Universe
(सृष्टि की उर्ध्वगति में विलयीकरण)
चार्ट में पुन: ईश्वर, जीव और शरीर स्तर से कैसे उपर उठा जायेगा, इस बात को भी दिखाया गया है । किस स्तर पर स्थिर रहने पर व्यक्ति को किस चक्रीय सिध्दान्त में चक्कर काटना पड़ता है, यह भी दिखाया गया है । हर स्तर का अपना एक चक्कर है । अत: परमेश्वर के अतिरिक्त किसी भी स्तर पर रहने से मोक्ष नहीं । The Chart further shows that a person at a state of Eeshwar (Soul), Jeeva (Self) or Sareer (body) can thus be elevated. Otherwise one has to follow the respective cycle of that level. Every stage has got its own cycle unless and until one gets GOD, one is not liberated from any cycle.
3. From GOD downwards
(परमेश्वर से सृष्टि नीचे की ओर)
सम्पूर्ण सृष्टि परमेश्वर से नीचे की ओर पीपल वृक्ष की तरह लटक रही है । परमेश्वर ही सभी का मूल है जो उपर है । The whole creation is downward from Paramatma or GOD. GOD is the root of all and staying up.
Conclusion:
उपसंहार :
वास्तव में परमाणु से लेकर परमेश्वर तक के बीच सम्पूर्ण अस्तित्त्व को यदि श्रेणीबध्दता के क्रम में रखा जाय तो जानने-देखने में पांच श्रेणियों में सम्पूर्ण स्थित है---

1. संसार-खिलकत-वर्ल्ड; 2. शरीर-जिस्म-बॉडी; 3. जीव-रूह-सेल्फ; 4. आत्मा-ईश्वर-ब्रम्ह-नूर-सोल-स्पिरिट-शिव 5. परमात्मा-परमेश्वर-परमब्रम्ह-खुदा-गॉड-भगवान् ।

इन उपर्युक्त पांचों में से

(1) संसार और (2) शरीर दोनों ही स्थूल श्रेणी में (3) सूक्ष्म श्रेणी में (4) कारण श्रेणी में और (5) परमकारण (महाकारण) श्रेणी में ही

सम्पूर्ण (परमाणु से परमेश्वर तक ) स्थित है । इन उपर्युक्त चारों श्रेणियों में रहने वाले की पृथक्-पृथक् रूप में यथार्थत: जानकारी और प्राप्ति हेतु इनकी अपनी-अपनी जानकारियां भी चार श्रेणियों में ही हैं। सारी सृष्टि अथवा सम्पूर्ण ब्रम्हाण्ड में उपर्युक्त चार प्रकार (श्रेणियों) का अस्तित्त्व-स्थिति और चार प्रकार (श्रेणियों) में जानकारियां हैं । नि:संदेह इसके बाहर कहीं कुछ भी नहीं है। यह बात सत्य है-- बिल्कुल ही सत्य है कि उपर्युक्त क्रमश: तीन श्रेणियों में ही सारी सृष्टि अथवा सम्पूर्ण ब्रम्हाण्ड का अस्तित्व (स्थिति) और जानकारियां होती रहती हैं। चौथी श्रेणी वाला अस्तित्व और जानकारी सृष्टि अथवा ब्रम्हाण्ड में रहती ही नहीं । केवल अवतार बेला में जबकि चौथी श्रेणी वाला परमकारण रूप खुदा-गॉड-भगवान् बिहिश्त-पैराडाइज-परमधाम से भू-मण्डल पर अवतरित (Incarnate) होता है । तब उसी के साथ ही उससे सम्बन्धित चौथी श्रेणी वाला तत्त्वज्ञान (Knowledge) भी उन्हीं के द्वारा प्रकट होता है । खुदा-गॉड-भगवान् के अवतार के वगैर कोई भी धरती का हो अथवा देवलोक तक का ही क्यों न हो, तत्त्वज्ञान (Knowledge) रूप सत्यज्ञान की यथार्थत: वास्तविक जानकारी न तो दे सकता है और न तो पा ही सकता है । यह सुनिश्चित सत्य पर आधारित तथ्य है जो सद्ग्रन्थीय सत्प्रमाणों से प्रमाणित भी है ।
If all the existences lying between atom and Almighty are arranged in a sequential form, they are found in Five main Categories.

1. World-Sansaar-Khilqat 2. Body-Shareer-Zism 3. Self-Rooh-Jeeva 4. Soul-Aatma-Eeshwar-Bramha-Noor-Spirit-Shiv and 5. GOD-Parmatma-Parmeshwar- Parambramha- Khuda-Bhagwan.

Of the above five, the first and the second lie under the category of 'Sthool' or 'Grossly'. The third under 'Sookshma' or 'Sceptal'. The forth under 'Causal' or 'Divine'. And the last one lies under the Supreme Category namely 'Absolute Causal' or 'Eternal'.

There are also Four respective Categories for knowing and gaining all the Four levels separately.

In the entire Universe, there are Four stages and Four Systems of Knowledge. Nothing remains out of these. This is completely True that the whole universe lie in the above Three categories and fourth one is always beyond the universe excepting when Khuda-GOD-Bhagwan of the Fourth Category incarnates down onto this earth from His Eternal Abode or Paramdham. Then the Fourth System comes down along with Him. None of this world or of Sceptal World of deities even, except GOD can impart Tattvagyan in a real sense which comes at the Fourth Category and none can achieve It also. This is a certain Truth and based on scriptural authenticities.

Sant Gyaneshwar Swami Sadanandji Paramhans

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